कश्मीर को लेकर हिन्दी प्रदेशों की भावनाओं के साथ खेला जा रहा है।

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कश्मीर को लेकर हिन्दी प्रदेशों की भावनाओं के साथ खेला जा रहा है। अख़बार और चैनल एक दिन बीजेपी के कार्यकर्ताओं को बेरोज़गार कर देंगे। उनका काम करते करते मीडिया बीजेपी हो गया है। आप हर दिन मीडिया के इस तरह होने को स्वीकार कर रहे हैं सिर्फ इसलिए कि वह आपके राजनीतिक मन को लुभा रहा है। झूठ और भड़काऊ बातों के आधार पर आप मीडिया के हाथ में खेल रहे हैं।

कश्मीर को लेकर हिन्दी प्रदेशों में कई तरह की भ्रांतियाँ हैं। हर बात का अतिरेक है। जानकारी का न तो संतुलन है और न दावों को लेकर सवाल है। सिर्फ ताली बजा देना समझ लेना नहीं है। थोड़ा सतर्क रहिए। कश्मीर के मसले में दिलचस्पी है तो पढ़िए और जानिए। काफी देर हो चुकी है। बार बार कह रहा हूँ कि हिन्दी के अख़बारों और चैनलों का खेल समझिए।

नहीं समझने के कारण ही कई लोग इस ख़बर को साझा कर रहे हैं कि नागालैंड के लोगों ने अलग रंग का झंडा फहराया। मणिपुर में बीस प्रकार की नागा जनजातियाँ रहती हैं। सभी के नेता और संगठन 14 अगस्त को कातोगी पब्लिक ग्राउंड में जमा हुए। 14 अगस्त 1947 को यहाँ जमाकर नगा स्वतंत्र दिवस मनाया था। उसी की याद में मणिपुर के कातोगी मैदान में मणिपुर, नागालैंड और म्यनमार में रहने वाले नगा लोग जमा हुए थे। कश्मीर के हालात के कारण इस बार बड़ी संख्या में लोग आसमानी रंग का झंडा लेकर जमा हुए। नारा था one goal one destiny यानि एक लक्ष्य, एक नियति। इस मौक़े पर नगा राष्ट्र गान भी गाया गया।

इसलिए विविधता को जानना चाहिए। आप खुद जानने की कोशिश करें। अख़बार और टीवी से सावधान रहें। वो आपको जागरूक नहीं कर रहे हैं। उनमें लोगों की बात कहने और सरकार से सवाल करने का साहस नहीं बचा है।

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