घायल आर टी आई एक्टिविस्ट जगदीश गोलिया कराहते रहे मगर अस्पताल नहीं ले गई राजस्थान पुलिस – रवीश कुमार

राजस्थान पुलिस की ये ख़बर देखिए। घायल आर टी आई एक्टिविस्ट जगदीश गोलिया कराहते रहे मगर अस्पताल नहीं ले गई। मौत हो गई। सरकारें हवा में ही चलती हैं। गहलौत सरकार को अपनी पुलिस का मनोवैज्ञानिक और सामाजिक उपचार कराना चाहिए और इन बदलावों की तरफ ध्यान देना चाहिए था। क्योंकि ऐसी ही एक घटना पहले भी हो चुकी है। रकबर ख़ान की पिटाई हुई थी। पुलिस को तुरंत अस्पताल ले जाना था मगर रात पर जीप में घुमाती रही। रकबर खान की मौत हो गई।

झारखंड का भी यही मामला था। तबरेज़ अंसारी को पुलिस अगर अस्पताल ले गई होती और समय से अच्छा उपचार होता तो शायद जान बच गई होती। ये संस्थाएँ सड़ गई हैं। क्लाएंट बेसिस पर काम करती हैं। पैसा और प्रभाव से अलग सुविधा मिलेगी और आम जन हैं तो कोई सुविधा नहीं मिलेगी। इसलिए थाना कचहरी और सरकारी दफ़्तरों के पास भटक रहे लोगों से मिलिए तो पता चलेगा कि इन संस्थाओं ने लोगों के जीवन में कितनी पीड़ा भर रखी है। आदमी असहाय घूम रहा है।आम आदमी अपने आवेदनों का लिफ़ाफ़ा लिए घूम रहा है। घूस कमाने वाला कमा रहा है। इन सब में पुलिस और न्याय व्यवस्था का हाल तो बहुत ही बुरा है।

अब इस केस मे लाइन हाज़िर करके क्या होगा? क्या जगदीश की ज़िंदगी वापिस आ सकेगी ?

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